Friday, 30 November 2018

HIMACHAL FLUTE फेसबुक पेज से जुड़े तथा जीवन को तनाव मुक्त बनाएं

💞HIMACHAL FLUTE💞
        🎶🎶💞💞🎶🎶

 *संगीत में वह शक्ति है जो आत्मा तथा परमात्मा का मिलन करवा देती है!* 
🌷🍃🌷🍃
*आपके जीवन के हर तनाव को मुक्त कर देती है! संगीत सुनकर अगर आपके *मन तथा *दिमाग को शांति मिलती है !  एक सुखद आभास होता है!*
🌺🌺🌺🌺
*तो *निश्चय ही आप HIMACHAL FLUTE  #पेज को #ज्वाइन करें ! तथा #संगीत से #रिश्ता #बनाएं*!🌷❣❣❣🌷
 *क्योंकि यह पेज आपको सदैव  "तनाव मुक्त" रखने के लिए वचनबद्ध है*. 
💕🌿💕🌿💕🌿
*क्योंकि इस पेज के माध्यम से आप अपनी मनपसंद का कोई भी संगीत सुन सकते हैं*!
🌷🍃🌷🍃🌷🍃
 *निम्न लिंक पर क्लिक करें तथा हमारे साथ रिश्ता बनाएंयह हमारा सौभाग्य होगा*!
🌸🌸🌿🌿🌸🌸
https://www.facebook.com/HimachalFlute/

HIMACHAL FLUTE STUDIO
THE MUSIC "NEST"OF NATION

Sunday, 4 November 2018

वो तीन सवाल



*🌿🌱"तीन सवाल"🌱🌿*

*एक बार एक राजा था। एक दिन वह बड़ा प्रसन्न मुद्रा में था सो अपने वज़ीर के पास गया और कहा कि तुम्हारी जिंदगी की सबसे बड़ी ख़्वाहिश क्या हैं? वज़ीर शरमा गया और नज़रे नीचे करके बैठ गया। राजा ने कहा तुम घबराओ मत तुम अपनी सबसे बड़ी ख़्वाहिश बताओ। वज़ीर ने राजा से कहा हुज़ूर आप इतनी बड़ी सल्लतनत के मालिक हैं और जब भी मैं यह देखता हूँ तो मेरे दिल में ये चाह जाग्रत होती हैं कि काश मेरे पास इस सल्लतनत का यदि दसवां हिस्सा होता तो मैं इस दुनिया का बड़ा खुशनसीब इंसान होता।*
 *ये कह कर वज़ीर खामोश हो गया। राजा ने कहा कि यदि मैं तुम्हें अपनी आधी जायदाद दे दूँ तो। वज़ीर घबरा गया और नज़रे ऊपर करके राजा से कहा कि हुज़ूर ये कैसे मुनकिन हैं? मैं इतना खुशनसीब इंसान कैसे हो सकता हूँ। राजा ने दरबार में आधी सल्लतनत के कागज तैयार करने का फरमान जारी करवाया और साथ के साथ वज़ीर की गर्दन धड़ से अलग करने का ऐलान भी करवाया। ये सुनकर वज़ीर बहुत घबरा गया।*
*राजा ने वज़ीर की आँखों में आँखे डालकर कहा तुम्हारे पास तीस दिन हैं, इन तीस दिनों में तुम्हें मेरे तीन सवालों के जवाब पेश करना हैं। यदि तुम कामयाब हो जाओगे तो मेरी आधी सल्लतनत तुम्हारी हो जायेगी और यदि तुम मेरे तीन सवालों के जवाब तीस दिन के भीतर न दे पाये तो मेरे सिपाही तुम्हारा सिर धड़ से अलग कर देंगे।* *वज़ीर ओर ज्यादा परेशान हो गया। राजा ने कहा मेरे तीन सवाल लिख लो, वज़ीर ने लिखना शुरु किया। राजा ने कहा....*

 *1) इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई क्या हैं?*
 *2) इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा क्या हैं?*
 *3) इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी क्या हैं?*

*राजा ने तीनों सवाल समाप्त करके कहा तुम्हारा समय अब शुरु होता हैं। वज़ीर अपने तीन सवालों वाला कागज लेकर दरबार से रवाना हुआ और हर संतो-महात्माओं, साधु-फक़ीरों के पास जाकर उन सवालों के जवाब पूछने लगा। मगर किसी के भी जवाबों से वह संतुष्ट न हुआ। धीरे-धीरे दिन गुजरते हुए जा रहे थे। अब उसके दिन-रात उन तीन सवालों को लिए हुए ही गुजर रहे थे। हर एक-एक गाँवों में जाने से उसके पहने लिबास फट चुके थे और जूते के तलवे भी फटने के कारण उसके पैर में छाले पड़ गये थे।*
*अंत में शर्त का एक दिन शेष रहा, फक़ीर हार चुका था तथा वह जानता था कि कल दरबार में उसका सिर धड़ से कलाम कर दिया जायेगा और ये सोचता-सोचता वह एक छोटे से गांव में जा पहुँचा। वहाँ एक छोटी सी कुटिया में एक फक़ीर अपनी मौज में बैठा हुआ था और उसका एक कुत्ता दूध के प्याले में रखा दूध बड़े ही चाव से जीभ से जोर-जोर से आवाज़ करके पी रहा था।*
*वज़ीर ने झोपड़ी के अंदर झाँका तो देखा कि फक़ीर अपनी मौज में बैठकर सुखी रोटी पानी में भिगोकर खा रहा था। जब फक़ीर की नजर वज़ीर की फटी हालत पर पड़ी तो वज़ीर से कहा कि जनाबेआली आप सही जगह पहुँच गये हैं और मैं आपके तीनों सवालों के जवाब भी दे सकता हूँ। वज़ीर हैरान होकर पूछने लगा आपने कैसे अंदाजा लगाया कि मैं कौन हूँ और मेरे तीन सवाल हैं? फक़ीर ने सूखी रोटी कटोरे में रखी और अपना बिस्तरा उठा कर खड़ा हुआ और वज़ीर से कहा साहिब अब आप समझ जायेंगे।*
 *फक़ीर ने झुक कर देखा कि उसका लिबास हू ब हू वैसा ही था जैसा राजा उस वज़ीर को भेंट दिया करता था। फक़ीर ने वज़ीर से कहा मैं भी उस दरबार का वज़ीर हुआ करता था और राजा से शर्त लगा कर गलती कर बैठा। अब इसका नतीजा तुम्हारे सामने हैं। फक़ीर फिर से बैठा और सूखी रोटी पानी में डूबो कर खाने लगा। वज़ीर निराश मन से फक़ीर से पूछने लगा क्या आप भी राजा के सवालों के जवाब नहीं दे पाये थे। फक़ीर ने कहा कि नहीं मेरा केस तुम से अलग था।*
*मैने राजा के सवालों के जवाब भी दिये और आधी सल्लतनत के कागज को वहीं फाड़कर इस कुटिया में मेरे कुत्ते के साथ रहने लगा। वज़ीर ओर ज्यादा हैरान हो गया और पूछा क्या तुम मेरे सवाल के जवाब दे सकते हो? फक़ीर ने हाँ में सिर हिलाया और कहा मैं आपके दो सवाल के जवाब मुफ्त में दूँगा मगर तीसरे सवाल के जवाब में आपको उसकी कीमत अदा करनी पड़ेगी।*
*अब फक़ीर ने सोचा यदि बादशाह के सवालों के जवाब न दिये तो राजा मेरे सिर को धड़ से अलग करा देगा इसलिए उसने बिना कुछ सोचे समझे फक़ीर की शर्त मान ली। फक़ीर ने कहा तुम्हारे पहले सवाल का जवाब हैं "मौत"।* 
*इंसान के जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई मौत हैं। मौत अटल हैं और ये अमीर-गरीब, राजा-फक़ीर किसी को नहीं देखती हैं। मौत निश्चित हैं। अब तुम्हारे दूसरे सवाल का जवाब हैं "जिंदगी"। इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा हैं जिंदगी। इंसान जिंदगी में झूठ-फरेब और बुरे कर्मं करके इसके धोखे में आ जाता हैं,अब आगे फक़ीर चुप हो गया। वज़ीर ने फक़ीर के वायदे के मुताबिक शर्त पूछी, तो फक़ीर ने वज़ीर से कहा कि तुम्हें मेरे कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पीना होगा।*
*वज़ीर असमंजस में पड़ गया और कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पीने से इंकार कर दिया। मगर फिर राजा द्वारा रखी शर्त के अनुसार सिर धड़ से अलग करने का सोचकर बिना कुछ सोचे समझे कुत्ते के प्याले का झूठा दूध बिना रुके एक ही सांस में पी गया।फक़ीर ने जवाब दिया कि यही तुम्हारे तीसरे सवाल का जवाब हैं।* "गरज"* *इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी हैं "गरज"। गरज इंसान को न चाहते हुए भी वह काम कराती हैं जो इंसान कभी नहीं करना चाहता हैं। जैसे तुम!*
*तुम भी अपनी मौत से बचने के लिए और तीसरे सवाल का जवाब जानने के लिए एक कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पी गये। गरज इंसान से सब कुछ करा देती हैं। मगर अब वज़ीर बहुत प्रसन्न था क्योंकि उसके तीनों सवालों के  जवाब उसे मिल गये थे। वज़ीर ने फक़ीर को शुक्रिया अदा किया और महल की ओर रवाना हो गया। जैसे ही वज़ीर महल के दरवाजे पर पहुँचा उसे एक हिचकी आई और उसने वहीं अपना शरीर त्याग दिया। उसको मौत ने अपने आगोश में ले लियाअब हम भी विचार करें कि क्या कहीं हम भी तो जिंदगी की सच्चाई को भूले तो नहीं बैठे हैं? जी हाँ जिंदगी की सच्चाई ये मौत। ये मौत न छोटा देखती हैं न बड़ा, न सेठ साहूकार देखती हैं। ये तो न जाने कब किस को अपने आगोश में ले ले कुछ कहा नहीं जा सकता।*
*क्योंकि ये अटल सत्य हैं और ये हर एक को आनी हैं। क्या हम जिंदगी के धोखे में तो नहीं आ पड़े हैं? हाँ जी बिल्कुल! हम धोखे में ही आये हुए हैं। हम जिंदगी को ऐसे जीते हैं जैसे ये जिंदगी कभी खत्म न होगी। हम जिंदगी में हर रोज नये-नये कर्मों का निर्माण करते हैं। इन कर्मों में कुछ अच्छे होते हैं तो कुछ बुरे। हम जिंदगी के धोखे में ऐसे फंसे हुए हैं कभी भूल से भी मालिक का शुकर नहीं करते हैं, कभी सच्चे दिल से मालिक का भजन सिमरन नहीं करते हैं। बस जिंदगी को काटे जा रहे हैं। क्या हम भी तो जिंदगी की कमजोरी के शिकार तो नहीं बने बैठे हैं? जी हाँ, हम सभी गरज के तले दबे हुए हैं। कोई अपने परिवार को पालने की गरज में झूठ-फरेब की राह पर चलने लगता हैं तो कोई चोरी और लूटपाट। हम सभी गरज की दलदल में फंसे हुए हैं।*
*हमें भी चाहिए कि जिंदगी की सच्चाई मौत को ध्यान में रखते हुए, जिंदगी की झूठ में न फंसे। क्योंकि जितना हम जिंदगी की सच्चाई से मुख मोड़ेगें उतना ही हम धोखे का शिकार होते जायेंगे। अत: जिससे हम जीवन भर जिंदगी की कमजोरी गरज के दलदल में ही फंसे रहे और बाहर ही न निकल सकें। इसलिए समय रहते हुए मालिक का भजन सिमरन करते रहे और मालिक को याद करते हुए उनका शुक्रियाअदा करते रहें। क्योंकि न जाने कब मालिक का फरमान आ जाए।* 
🌱🌿 
Himachal Flute Studio Creation
Beautiful City Chandigarh
www.asrhpblogspot.com

Tuesday, 18 September 2018

उम्मीद का दिया, एक सुंदर प्रसंग

  .......... उम्मीद का दिया दीपक....

एक घर मे *पांच दिए* जल रहे थे।

एक दिन पहले एक दिए ने कहा -

इतना जलकर भी *मेरी रोशनी की* लोगो को *कोई कदर* नही है...

तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं।

वह दिया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया ।

जानते है वह दिया कौन था ?

वह दिया था *उत्साह* का प्रतीक ।

यह देख दूसरा दिया जो *शांति* का प्रतीक था, कहने लगा -

मुझे भी बुझ जाना चाहिए।

निरंतर *शांति की रोशनी* देने के बावजूद भी *लोग हिंसा कर* रहे है।

और *शांति* का दिया बुझ गया ।

*उत्साह* और *शांति* के दिये के बुझने के बाद, जो तीसरा दिया *हिम्मत* का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया।

*उत्साह*, *शांति* और अब *हिम्मत* के न रहने पर चौथे दिए ने बुझना ही उचित समझा।

*चौथा* दिया *समृद्धि* का प्रतीक था।

सभी दिए बुझने के बाद केवल *पांचवां दिया* *अकेला ही जल* रहा था।

हालांकि पांचवां दिया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह *निरंतर जल रहा* था।

तब उस घर मे एक *लड़के* ने प्रवेश किया।

उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ *एक ही दिया* जल रहा है।

वह खुशी से झूम उठा।

चार दिए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ।

यह सोचकर कि *कम से कम* एक दिया तो जल रहा है।

उसने तुरंत *पांचवां दिया उठाया* और बाकी के चार दिए *फिर से* जला दिए ।

जानते है वह *पांचवां अनोखा दिया* कौन सा था ?

वह था *उम्मीद* का दिया...

इसलिए *अपने घर में* अपने *मन में* हमेशा उम्मीद का दिया जलाए रखिये ।

चाहे *सब दिए बुझ जाए* लेकिन *उम्मीद का दिया* नही बुझना चाहिए ।

ये एक ही दिया *काफी* है बाकी *सब दियों* को जलाने के लिए ....

सबसे बड़ा योग
एक दूसरे के सुख दुख में सहयोग
Himachal Flute 

Friday, 14 September 2018

दोस्ती की हिफाजत करना भी एक दायित्व है

एक बार एक केकड़ा समुद्र किनारे अपनी मस्ती में चला जा रहा था और बीच बीच में रुक कर अपने पैरों के निशान देख कर खुश होता। आगे बढ़ता पैरों के निशान देखता और खुश होता!
इतने में एक लहर आई और उसके पैरों के सभी निशान मिट गये, इस पर केकड़े को बड़ा गुस्सा आया, उसने लहर से कहा-
ए लहर मैं तो तुझे अपना मित्र मानता था, पर ये तूने क्या किया ,मेरे बनाये सुंदर पैरों के निशानों को ही मिटा दिया कैसी दोस्त हो तुम।
तब लहर बोली वो देखो पीछे से मछुआरे पैरों के निशान देख कर केकड़ों को पकड़ने आ रहे हैं। हे मित्र, तुमको वो पकड़ न लें ,बस इसीलिए मैंने निशान मिटा दिए। ये सुनकर केकड़े की आँखों में आँसू आ गये।
*सच यही है, कई बार हम सामने वाले की बातों को समझ नहीं पाते और अपनी सोच अनुसार उसे गलत समझ लेते हैं जबकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, अतः मन में बैर और वैमनष्यता लाने से बेहतर है कि हम दिल से सोचें दिल की सुने फिर निष्कर्ष निकालें।*
माननीय नहीं मानवीय बनें!
Himachal Flute Studio Creation

जिंदगी की शाम ढलने को है

*ज़िन्दगी की शाम ढलने को है .. सावधान*

कभी इस लड़ाकू औरत से बात नहीं करूँगा ! 
पता नहीं समझती क्या है खुद को ? 
जब देखो झगड़ा..
सुकून से रहने नहीं देती ! बड़बड़ाते हुए वह घर से बाहर निकल गया ।

नजदीक के चाय के स्टॉल पर पहुँच कर चाय ऑर्डर की और सामने रखे स्टूल पर बैठ गया। 
"इतनी सर्दी में बाहर चाय पी रहे हो !"
उसने गर्दन घुमा कर देखा तो साथ के स्टूल पर बैठे बुजुर्ग उससे मुख़ातिब थे।
"आप भी तो इतनी सर्दी और इस उम्र में बाहर हैं !"

बुजुर्ग ने मुस्कुरा कर कहा...
मैं निपट अकेला । 
न कोई गृहस्थी, न साथी। 
तुम तो शादीशुदा लगते हो ।

पत्नी घर में जीने नहीं देती। हर समय चिकचिक। 
बाहर न भटकूँ तो क्या करूँ ! गर्म चाय के घूँट अंदर जाते ही दिल की  कड़वाहट निकल पड़ी।

बुजुर्ग अब थोड़ा संजीदा होकर बोले:
"पत्नी जीने नहीं देती ! बरखुरदार, ज़िन्दगी ही पत्नी से होती है । 
8 बरस हो गए हमारी पत्नी को गए हुए।"
बुजुर्ग ने ठंडी साँस के साथ अपनी वेदना छलकाते हुए कहा--जब ज़िंदा थी, 
कभी कद्र नहीं की। 
आज कम्बख़्त चली गयी तो भूलाई नहीं जाती । 
घर काटने को होता है। बच्चे अपने अपने काम में मस्त।"
आलीशान घर, धन दौलत सब है ! पर उसके बिना कुछ मज़ा नहीं...
यूँ ही कभी कहीं, कभी कहीं भटकता रहता हूँ।"

"कुछ अच्छा नही लगता, उसके जाने के बाद, पता चला वो धड़कन थी --- मेरे जीवन की ही नहीं, मेरे घर की भी ! सब बेजान हो गया  हैं... बुज़ुर्ग की आँखों में दर्द और आंसुओं का समंदर था।

उसने चाय वाले को पैसे दिए। नज़र भर बुज़ुर्ग को देखा। एक मिनट गंवाए बिना घर की ओर मुड़ गया।
चिंतित पत्नी दरवाजे पर ही खड़ी थी।
"कहाँ चले गए थे? जैकेट भी नहीं पहना, ठण्ड लग जाएगी तो?"

"तुम भी तो बिना स्वेटर के दरवाजे पर खड़ी हो।"
दोनों ने आँखों से एक दूसरे के प्यार को पढ़ लिया।

ज़िन्दगी कैसी है पहेली हाय !... 
कभी तो रुलाये कभी ये हँसाये !!! 
Himachal Flute
Studio Creation

Friday, 31 August 2018

प्रकृति से ही जीवन है.. लेखिका श्रीमती प्रियंका कौशल की कलम से

             

            🍁🌷 ...Nature..🍁🌷


लेखिका की कलम से........✍✍✍...

हमारे आस पास जो भी है, एक साए की तरह जो भी दिखता है, यह प्रकृति का ही एक अंश है! यह प्रकृति हमें बहुत कुछ प्रदान करती हैं! जिसका मानव जाति तथा अन्य सभी जातियां आनंद उठा रही हैं!
पीने के लिए पानी,शुद्ध हवा के लिए पेड़ पौधे, इन सभी का प्रत्येक के लिए बहुत ही महत्त्व है! अगर यह सुरक्षित नहीं होंगे ,तो हम भी सुरक्षित नहीं होंगे! कल कल करते, बहते झरनों की आवाज ,पक्षियों के चहचहाने की आवाज, जब हमारे कानों में पढ़ती है तो कितना सुकून मिलता है! हमारी प्रकृति बहुत ही सुंदर है जिसके अनुकरण को लिखने के लिए कोई शब्द नहीं है! इसके लिए हमें सदैव परमात्मा का धन्यवाद करना चाहिए! इस प्राकृतिक रहस्य का आनंद लेने के लिए जिसने हमें पृथ्वी पर जन्म दिया!
बरसात में रिमझिम-रिमझिम करती बारिश की बूंदे ,अपनी ही मौज में बहती हुई नदियां, आसमान में बादलों का उमड़ना ,बिजली का चमकना ,यह सब कितना मधुर भाव भरता है, जब हम इस प्रकृति के जादू को देखते है!.

                       🌸🌸🌸
"भरा नहीं भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं, 
वह हृदय नहीं पत्थर है जिसे प्रकृति से प्यार नहीं!!"
                      🌸🌸🌸
हमें प्रकृति की हर चीज के साथ एक पारिवारिक रिश्ता रखना चाहिए तथा उसकी सुरक्षा करनी चाहिए! आओ सब मिलकर पेड़ लगाएं तथा अपनी इस सुंदर धरा को बचाने का संकल्प लें!

🍁🌷.🍁🌷
Present By.:
Himachal Flute Studio Creation ....
Sec.29,Chandigarh...India.
www.asrhpblogspot.com

Thursday, 26 July 2018

Save The Tree , आओ पेड़ लगाएं

प्रिय दोस्तों,
एक विशेष अभियान के तहत हिमाचल के कुछ प्रांतों में विशेष प्रकार के  पौधों का पौधारोपण करने का अवसर मिल रहा है!  मैं चाहता हूं संगीत परिवार से भी कुछ लोग  इस अभियान में जुड़े , तथा  पुण्य कमाए , और प्रकृति  को सुंदर बनाने में  सहयोग दें ! क्योंकि कुछ दायित्व हमारा भी बनता है बाकी फैसला आपको लेना है!


#नोट: जो लोग स्वेच्छा से इस अभियान में जुड़ना चाहते हैं बे अपना नाम पता मोबाइल नंबर इनबॉक्स में भेजें क्योंकि उन सदस्यों का हिमाचल प्रदेश सरकार से आइडेंटिटी कार्ड बनेगा!

[तमाम उम्र जिन पेड़ों से सांस ली है ,क्या आज 2 दिन का वक्त उनके लिए  निकाल पाओगे]
कुछ भी ना कर पाओ तो इस पोस्ट को शेयर जरूर करें!
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें (9675300547)

प्रभु की महिमा

* हरिनाम जप किस प्रकार करें * जप करने के समय स्मरण रखने वाली कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण बातें : पवित्र हरिनाम को भी अर्च-विग्रह और पवित्र धाम ...