Friday, 9 October 2026

एक ऐसा पत्र जो बदल सकता था पोंग बांध विस्थापन का निर्णय

यह पत्र पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरो (Partap Singh Kairon) द्वारा भारत सरकार के केंद्रीय सिंचाई एवं बिजली मंत्री हाफिज मोहम्मद इब्राहिम (Hafiz Mohd. Ibrahim) को (या केंद्रीय सरकार के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी को) लिखा गया था।

यह श्री हेम राज, सांसद (कांगड़ा) और लाहुल एवं स्पीति परिषद के सदस्य श्री निहाल चंद द्वारा उठाए गए मुद्दों के संबंध में मेरे अर्ध-शासकीय (D.O.) पत्र संख्या 3298, दिनांक 27 जून 1960 के क्रम में है। अब मैं प्रस्तावित ब्यास बांध के परिणामस्वरूप कृषकों के विस्थापन से जुड़े तीसरे मुद्दे पर बात कर रहा हूँ।
• मैं पोंग में जलाशय के फैलाव को दर्शाने वाला एक नक्शा संलग्न कर रहा हूँ। जलमग्न होने वाला कुल क्षेत्रफल लगभग 58,000 एकड़ है, जिसमें से लगभग आधा भाग बंजर/गैर-कृषि योग्य है। संलग्न नक्शे से यह प्रतीत होता है कि कृषि योग्य भूमि मुख्य रूप से नदी के दाहिने तट पर है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार, जो घाटी जलमग्न हो रही है, वह काफी उपजाऊ और घनी आबादी वाली है।
• भूमि के संबंध में यह संक्षिप्त स्थिति है। जहाँ तक लोगों का प्रश्न है, अब तक के मोटे अनुमान के अनुसार लगभग 9,400 परिवार विस्थापित होंगे। यह 1951 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित है। चूँकि वास्तविक विस्थापन 1969 के आसपास होगा, इसलिए परिवारों की संख्या में वृद्धि होगी। इस वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, तथा प्रति परिवार लगभग पाँच व्यक्तियों का औसत मानकर, ऐसा प्रतीत होता है कि मानव विस्थापन का स्तर लगभग 70,000 लोगों (आत्माओं) के आसपास होगा। इस प्रकार, श्री हेम राज का यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि केवल इतने ही कृषक विस्थापित होंगे।
• भाखड़ा बांध से केवल 27,000 लोग विस्थापित हुए थे। इस प्रकार, ब्यास बांध के मामले में यह समस्या आकार और गंभीरता में कहीं अधिक बड़ी है। इसके अलावा, एक अतिरिक्त कठिनाई यह भी होगी कि जब भाखड़ा पर निर्णय लिया गया था, उसकी तुलना में आज लोग अपने अधिकारों के प्रति अधिक मुखर और जागरूक हैं। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि पर्याप्त पुनर्वास उपायों की योजना बनाई जाए और उन्हें समय रहते लागू किया जाए।
• इस संबंध में, क्या मैं आपसे हाफिज मोहम्मद इब्राहिम को लिखे मेरे 7 जून के पत्र (प्रति संलग्न) को एक बार देख लेने का कष्ट देने का अनुरोध कर सकता हूँ? मुझे लगता है कि यह एक अत्यंत जरूरी मामला है कि राजस्थान नहर के शुरुआती/शीर्ष क्षेत्रों (head reaches) में सबसे अच्छी जमीन के बड़े टुकड़े (compact blocks) पोंग के विस्थापितों के लिए तुरंत आरक्षित किए जाने चाहिए। मेरा यह भी मानना है कि हमें परियोजना के बजट अनुमान में ही पुनर्वास उपायों के लिए उदारतापूर्वक प्रावधान करना चाहिए। मेरा मानना है कि वर्तमान में प्रदान की गई राशि केवल ₹250/- प्रति परिवार की दर से है, जिससे आप भी सहमत होंगे कि यह अत्यंत दयनीय और कम है। अंत में, मुझे यह भी लगता है कि हमें ऐसे उपाय करने चाहिए जिससे विस्थापित आबादी में से कुछ लोग कांगड़ा जिले के ही आसपास के क्षेत्रों में बस सकें। इसके लिए, हमें उस क्षेत्र में एक या दो औद्योगिक एस्टेट स्थापित करने पड़ सकते हैं, जहाँ क्षेत्र के अनुकूल उद्योगों का विकास किया जा सके; जैसे लकड़ी पर आधारित उद्योग, हल्के इंजीनियरिंग उद्योग, हस्तशिल्प आदि। इसके लिए हमें इन विस्थापितों के पुनर्वास के साथ औद्योगिक विकास की योजनाओं का तालमेल बिठाना होगा। मुख्य बात यह है कि परियोजना को इतनी बड़ी संख्या में विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए उदारतापूर्वक धन आवंटित करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
• मैं अपने इंजीनियरों से इस बात पर भी विचार करने के लिए कह रहा हूँ कि क्या बांध की ऊंचाई को थोड़ा कम करके कोई लाभ प्राप्त किया जा सकता है, जिससे विस्थापन के दायरे को कम किया जा सके। बेशक, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इससे आवश्यक लाभ प्रभावित न हों, विशेष रूप से नहर जल विवाद के संदर्भ में।

एक ऐसा पत्र जो बदल सकता था पोंग बांध विस्थापन का निर्णय

यह पत्र पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरो (Partap Singh Kairon) द्वारा भारत सरकार के केंद्रीय सिंचाई एवं बिजली मंत्री हाफिज मोह...